JAUNPUR. जौनपुर जिले के शहर कोतवाली में कथित ब्लैकमेलर पत्रकार के खिलाफ दर्ज गंभीर धाराओं में मुकदमों के बाद भी अभी तक गिरफ्तारी नहीं होने से महिला चिकित्सक डर के साए में जी रही है। वही आरोपी ब्लैकमेलर पत्रकार खुद के लिए न्याय मांगता फिर रहा है और जनपद में कुछ स्वैच्छिक संगठनों से प्रदर्शन भी कराकर अपने आरोपों पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहा है। पुलिस की माना जाए तो पुलिस अपना काम करने का दावा कर रही है और आरोपी की खोज भी कर रही है।
आपको बता दे की जिले के एक नामी गिरामी जिले से लेकर दिल्ली तक हिलाने की कुबत रखने वाला कथित ब्लैक मेलर पत्रकार के खिलाफ शहर कोतवाली में एक महिला चिकित्सक ने पुलिस को तहरीर देकर बताया कि कथित पत्रकार यू ट्यूबर एक फर्जी युवती के गर्भपात कराने को लेकर हुई फोन पर बातचीत को वायरल करने की धमकी दी। उसने इसके एवज़ में पैसे और शारीरिक सम्बन्ध के लिए भी दबाव बनाया। जिसके बाद पुलिस विगत 13 जुलाई को उस कथित पत्रकार व ब्लैकमेलर तामीर हसन शिबू के ख़िलाफ़ विभिन्न धाराओं में मुक़दमा दर्ज करके विवेचना महिला पुलिस अफसर को दिया है। इसके बाद हफ़्ते भर में पीड़ित चिकित्सक का क़लम बन्द बयान भी दर्ज हुआ। विवेचना अभी जारी है, लेकिन आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर रहते हुए एक स्वैक्षिक संगठन के बैनर तले प्रदर्शन करके खुद के लिए न्याय मांगता फिर रहा है, वह बराबर सोशल मीडिया पर पुलिस और पीड़ित महिला चिकित्सक के खिलाफ लगातार ज़हर उगल रहा है। जिससे महिला चिकित्सक भय की साए में जीने को मजबूर हैं।
सूत्रों की माना जाए तो इस पूरे प्रकरण में कथित स्वयंभू पत्रकार के ब्लैकमेलर गिरोह में तीन अहम किरदार हैं। जो वसूली में अलग-अलग तरह की किरदार निभाते हैं। इनमें दूसरे के बनाए आडियो- वीडियो को पहले किरदार वायरल करने और धमकी देकर वसूली की डिमांड करता है और पीड़ित के दबाव में आते ही दूसरा किरदार वसूली की रकम लेने जाता है, जबकि तीसरा किरदार ही पटकथा लेखक होता है। उसे ही किरदारों का मुख्य सूत्रधार माना जाता है।
बताते हैं कि इस खेल में दवा माफियाओं का हाथ भी है जो महिला चिकित्सक को अपनी निशाने पर लेने के लिए कामयाबी की सीढ़ी ढूंढ रही थी लेकिन मुकदमा दर्ज होने के बाद दवा माफिया अभी पीछे मुड़ने में ही भलाई समझ लिया है। और ऐसे ही दवा माफिया का वरद हस्त ब्लैकमेलर पत्रकार के ऊपर बताया जा रहा है।
आरोप है कि पीड़ित महिला चिकित्सक से प्रतिबंधित दवाई उनके माध्यम से बेचवाने के चक्कर में यह ब्लैकमेलिंग का खेल खेला जा रहा था लेकिन महिला चिकित्सक इस गिरोह के निशाने पर आईं जरूर, लेकिन उन्होंने गिरोह का शिकार होने के बजाय शिकारी को कटघरे की दहलीज़ तक पहुंचा दिया है। चिकित्सक ने बताया कि हम सही हैं तो डर काहे का करें। अब न्यायालय से ही न्याय मिलेगा।
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