ALLAHABAD. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नरेट प्रणाली में ‘शांति भंग’ संबंधी धाराओं के दुरुपयोग पर सख्त रुख अपनाते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने मंसूर अहमद की अवैध हिरासत के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उन्हें ₹2 लाख मुआवजा देने का आदेश दिया है। अदालत ने निर्देश दिया कि यह राशि संबंधित दोषी तत्कालीन सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के वेतन से वसूली जाए।
अदालत ने गाजियाबाद और प्रयागराज समेत कई जिलों में पुलिस शक्तियों के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए पूरे उत्तर प्रदेश के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार, अब शांति भंग की कार्रवाई में बाहरी जमानती की आवश्यकता नहीं होगी और केवल ₹20,000 के पर्सनल बांड पर तत्काल रिहाई दी जाएगी।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि 24 घंटे से अधिक की अवैध हिरासत की स्थिति में राज्य सरकार को पीड़ित को ₹25,000 प्रतिदिन के हिसाब से मुआवजा देना होगा। बाद में यह राशि दोषी अधिकारी के वेतन से वसूल की जाएगी।
अदालत ने प्रयागराज पुलिस कमिश्नर को 14 सितंबर 2026 तक आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है।
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