RAMPUR. जौनपुर जिले के मड़ियाहू तहसील के रामपुर बाजार में मंगलवार की देर शाम पहुंचे मड़ियाहू के उप जिलाधिकारी कुणाल गौरव ने अपने तालिबानी फरमान को वापस लेते हुए गरीब के मकान का दरवाजा बंद करने वाले निर्माणकर्ता को एक-एक ईट को दरवाजे से हटाने का कड़ा निर्देश दिया है। एसडीएम के कारवाई से बीआरसी 24 न्यूज़ का असर साफ दिखाई पड़ा।

बीआरसी 24 न्यूज़ सोमवार से एसडीएम द्वारा दिए गए फरमान का समाचार जनता के सामने पहुंचा रहा है। एसडीएम द्वारा मौके पर स्थल निरीक्षण करने के बाद गरीब को न्याय मिलता दिखाई पड़ा जिससे छोटे-छोटे बच्चों के चेहरे पर खुशी की बयार बह गई है।
दरवाजा बंद करने का मामला क्या है
रामपुर बाजार में सुरेश प्रजापति का मकान बना हुआ है। उनके विपक्षी आनंद कन्नौजिया से काफी दिनों से जमीनी विवाद चल रहा है। मामले में दफा 24 की भी कार्रवाई सुरेश प्रजापति की गैर मौजूदगी में गुपचुप तरीके से कराई गई थी। शनिवार को थाना समाधान दिवस पर मौजूद एसडीएम कुणाल गौरव के सामने आनंद कन्नौजिया पहुंचकर गलत बयानी देते हुए मामले से अवगत कराया।

इसके बाद एसडीएम ने समझा कि पत्थर गड्डी हो गई है विपक्षी कब्जा लेने नहीं दे रहा है। जिसके बाद उन्होंने बिना स्थल निरीक्षण के ही आदेश दे दिया की बाउंड्री वॉल बनवा लिया जाए। आदेश पाते ही विपक्षी ने गरीब मजदूर का पूरा दरवाजा ही पक्की ईटों से बंद कर दिया। दरवाजा बंद होते ही छोटे-छोटे बच्चे सड़क पर आ गए और खुले आसमान में जीने को मजबूर हो गए। इसके बाद रामपुर बाजार में विपक्षी द्वारा किए गए हरकत से हड़कम्प मच गया। बीआरसी 24 न्यूज़ ने प्राथमिकता के साथ न्यूज़ प्रसारित किया।

बीआरसी 24 न्यूज़ पर समाचार चलने के बाद एसडीएम ने थाने में क्यों किया पंचायत
एसडीएम द्वारा दिए गए तालिबानी फरमान का समाचार चलते ही जिले में भूचाल सी आ गई। समाचार में किस प्रकार गरीब मजदूर का दरवाजा पक्की ईंटों से बंद किया जा रहा था उसे साफ-साफ दिखाया गया था। सूत्र बताते हैं कि अधिकारियों की पहल पर उपजिलाधिकारी ने क्षेत्राधिकारी मड़ियाहूं के साथ रामपुर थाने पर पहुंचे और सुरेश कुमार प्रजापति एवं उसके मंद बुद्धि भाई समेत विपक्षी को भी थाने बुलवाया। बताया जाता है कि मजदूर सुरेश से समझौता करने की बात उल्टे किया जाने लगा जब मजदूर ने कहा की आपके न्यायालय में क्या यही कानून है कि मेरे गैर मौजूदगी में और बिना किसी हस्ताक्षर के और किसी नोटिस के बिना पक्की पैमाइश कैसे कर दिया गया। क्या नोटिस अथवा किसी भी कागज पर पक्की पैमाइश करने का हस्ताक्षर कराया गया है तो बताते हैं एसडीएम साहब कुछ नहीं बोल सके उसके बाद मजदूर सुरेश ने कहा कि साहब जब न्यायालय में मुकदमा बिचाराधीन है तो मेरे मकान को बंद करने का अधिकार किसने दिया था। इतना पूछने के बाद भी कोई भी अधिकारी जवाब नहीं दे सका। इसके बाद सुरेश ने किसी भी कागज पर न्यायालय का फैसला आने तक हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। जिसके बाद उसके मंदबुद्धि भाई को थाने में पुलिस की अभिरक्षा में बैठा लिया गया और सुरेश प्रजापति को छोड़ दिया गया।

उपजिलाधिकारी, सीओ के घटनास्थल पर पहुंचते ही आंखें फटी की फटी रह गई
मजदूर ने थाने में जब किसी भी कागजात पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया तो मंगलवार की देर शाम उप जिलाधिकारी कुणाल गौरव ने क्षेत्राधिकारी मडियाहूं गिरेंद्र कुमार सिंह, थानाध्यक्ष देवानंद रजक, हल्का लेखपाल विपिन कुमार यादव एवं पुलिस फोर्स को लेकर स्थलीय निरीक्षण करने के लिए मजदूर के घर पहुंचे। मौके पर पहुंचते ही घर के मुख्य दरवाजे का नजारा देखते ही एसडीएम की आंखें फटी की फटी रह गई। मानो उनके पैर के नीचे से जमीन खिसकती दिखने लगी। मंजर देखकर एसडीएम साहब की मानवता इस कदर जागी कि उन्होंने सभी के सामने ही निर्माणकर्ता पर आग बबूला हो गए उन्होंने पूछा कि इस गरीब का दरवाजा बंद करने के लिए कौन कहा था। उसके बाद निर्माणकर्ता कुछ बोल नहीं सका। एसडीएम साहब ने कहा कि बुधवार की सुबह तक एक भी ईट दरवाजे पर रही तो कड़ी कार्रवाई करवाऊंगा। जो हो गया सो हो गया जब तक मामला न्यायालय में विचाराधीन है कोई भी निर्माण मौके पर नहीं होगा।

एसडीम के जाने के बाद मजदूर के घर क्या हुआ
मौके पर एसडीएम कुणाल गौरव का नैसर्गिक न्याय देखकर मजदूर सुरेश प्रजापति की आंखें छलछला गई इसके साथ ही उसके छोटे-छोटे बच्चे और पत्नी की आंखों में खुशी की आंसू निकल पड़े। सुरेश प्रजापति ने कहा की वास्तव में एसडीएम न्याय प्रिय हैं उन्हें भ्रमित कर गलत आदेश करवा लिया गया था जब एसडीएम साहब ने स्थल निरीक्षण देखा तो तुरंत अपने कमियों को वापस लेते हुए मुझे न्याय देने का काम किया। इसके साथ ही सुरेश ने बीआरसी 24 न्यूज़ को भी धन्यवाद दिया कहा कि बीआरसी 24 न्यूज़ ने सच्चाई दिखाई है जिसके कारण आज मुझे न्याय मिल सका।
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