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MARIYAHU NEWS. वकीलों को दलाल कहने वाला लेखपाल कैसे बना करोड़ों का स्वामी

MARIYAHU. जौनपुर जिले की मड़ियाहूं तहसील में वकीलों के ऊपर अभद्र टिप्पणी करने वाला लेखपाल रामपुर सर्किल में तैनाती के दौरान वादकारियों से काम करने का झांसा देकर अब तक करोड़ों रुपए का स्वामी बन चुका है। दरी पर बैठने वाला लेखपाल लाखों रुपए की चमचमाती गाड़ी से चलता था और दो सहायकों से खुलेआम वादकारियों को लूटने का काम करता था। अगर उक्त लेखपाल की बारीकियों से जांच की जाए तो उसके सर्किल में लूटने के कई किस्से अलग-अलग देखने को मिलेगा।

फोटो-जिलाधिकारी द्वारा आदेश की कॉपी

अभद्र टिप्पणी करने वाला लेखपाल मनोज यादव कहां का निवासी है !
वकीलों पर अभद्र टिप्पणी करते हुए दलाल कहने वाला लेखपाल मनोज यादव मछलीशहर तहसील के सिकरारा रीठी का निवासी बताया जाता है। मड़ियाहूं तहसील से स्थानांतरण के बाद वह अपने ही गृह तहसील में जाने से जहां खुशी महसूस कर रहा है वही अब खुलेआम नहीं लूट पाने का गम भी उसे सता रहा है।

फोटो- इंटरनेट से निकाली गई स्कॉर्पियो गाड़ी

लेखपाल मनोज यादव किस गाड़ी से चलता था
मड़ियाहूं तहसील में जब मनोज कुमार यादव लेखपाल बनकर आया था तो वह टूटी-फूटी बाइक लेकर पहुंचा था उस बाइक को देखकर ही उसके घर की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता था। लेकिन जैसे ही उसे रामपुर सर्किल का इंचार्ज बनाया गया उसकी आमदनी दिन दूना रात चौगुनी बढ़ने लगी और देखते ही देखते वह महिंद्रा कंपनी के टॉप टेन मॉडल स्कॉर्पियो का मालिक बन गया उसके बाद जब इस गाड़ी से चलने की हसरतें पूरी हो गई और बड़ी गाड़ी गांव में ले जाने में दिक्कते होने लगी तो वह हुंडई कंपनी के टॉप टेन गाड़ी औंरा मॉडल से चलने लगा। यह दिगर बात है इन दोनों गाड़ियों का मालिक कौन है किसके नाम से गाड़ी खरीदी गई है।

फोटो- इंटरनेट से निकल गई हुंडई कंपनी की औरा गाड़ी

इसकी सच बीआरसी 24 न्यूज़ के पास नहीं है और न तो आज तक किसी को पता है, लेकिन लेखपाल मनोज कुमार यादव वादकारियों का कोई भी कार्य हो इसी दोनों गाड़ियों से बारी-बारी से आते और जाते देखा जाता था। मजे की बात यह है कि वकीलों को दलाल समझने वाला यह लेखपाल इतना चालाक था की कभी भी अपने इन वेशकीमती चमचमाती गाड़ियों को तहसील के अंदर अधिकारियों के सामने नहीं ले जाता था। करोड़ों लूटने वाला लेखपाल को तहसील के वकील आज भी दरी पर बैठने वाला लेखपाल समझते चले आ रहे हैं।


लेखपाल मनोज कुमार यादव का काम करने का क्या था तरीका
वकीलों को दलाल कहने वाला लेखपाल मनोज कुमार यादव तहसील प्रांगण के अंदर अकेले घूमता था लेकिन रामपुर सर्किल में दो प्राइवेट सहायकों से काम करवाता था। रामपुर बरसठी रोड पर 10×10 का एक कमरा किराए पर ले रखा था जिसमें दो लेखपाल एक ही बिरादरी के ही रहते थे। सूत्र बताते हैं कि इन्हीं दोनों सहायक को क्षेत्र के वादकारी लेखपाल समझते थे। यही दोनों क्षेत्र में वादकारियों को फंसाने का काम करते थे इसके बाद उसी कमरे पर ले जाकर बड़े लेखपाल साहब यानी मनोज कुमार यादव के सामने सौदेबाजी होती थी। तब जाकर किसी को मकान बनवाना हो अथवा उसकी पैमाइश करना हो फाट गलत बनवाना हो या किसी के खेत में जरीब को घुसाना हो सब पैसे के आधार पर तय होता था। यही पैसा लेखपाल को बेलगाम बना दिया था और वकीलों पर अभद्र टिप्पणी करना सिखा दिया था।
क्या मजाल था एक भी ईट लेखपाल को बताएं बिना काश्तकार रख पाता था
जी हां आपने सही पढ़ा! रामपुर क्षेत्र में किसी को अपने सपने की मकान बनाना हो तो लेखपाल मनोज कुमार यादव को बिना सूचना दिए कोई भी व्यक्ति, किसान, वादकारी एक ईंट भी नींव में नहीं रख पाता था। अगर वह भूल से रख भी लिया तो लेखपाल को पता लगते ही उसका काम वहीं रुक जाता था। सूत्र बताते हैं की लेखपाल तुरंत काश्तकार के पड़ोसी को बुलाता था और उसकी जमीन में मकान बनवाने की बात बताते हुए तुरंत थाना पुलिस को सूचित करवाता था इसके बाद उसका काम बंद हो जाता था। वह दूसरी बात है कि मकान बनवाने वाला लेखपाल के पास पहुंच जाता था तो सारा विवाद दूध में पानी की तरह साफ हो जाता था और पुनः काम चालू हो जाता है। रामपुर क्षेत्र में काश्तकारों के साथ लेखपाल द्वारा लूटम लूट मची थी।
लेखपाल के आतंक से रामपुर सर्किल अभी भी क्यों रहा कराह !
वकीलों पर अभद्र टिप्पणी करने वाला लेखपाल मनोज कुमार यादव का स्थानांतरण भले ही मछलीशहर तहसील में हो गया है लेकिन रामपुर में तैनात उनका दूसरा साथी लेखपाल अभी भी तैनात है। दोनों की हालत एक जैसी थी पूरे रामपुर सर्किल में यही दोनों लेखपालों का सिक्का चलता है। इनका एक साथी लेखपाल आज भी इस सर्किल में तैनात है जो आए दिन काश्तकारों का जीना दुश्वार कर दिया है। संयोग कह ले अथवा शासन का सिस्टम कह ले काश्तकार चाहे कितना भी अपना पंख फड़फड़ा ले अधिकारी के सामने जो लेखपाल बतायेगा वही अधिकारी सुनेंगे। जिसके कारण काश्तकार तहसील में पहुंचकर अपनी चप्पल को घिसता रहता है जब तक उसके ऊपर लेखपाल की मेहरबानी नहीं होती तब तक वह तहसील का दौड़ लगाता रहता है। बीआरसी 24 न्यूज़ के पास सैकड़ो काश्तकारों का शिकायत है लेकिन यहां बताना और दिखाना अभी उचित नहीं है।
वकीलों पर अभद्र टिप्पणी व्हाट्सएप स्टेटस के माध्यम से देने वाला लेखपाल मनोज कुमार यादव का स्थानांतरण मछलीशहर तहसील में 19 जून को जिलाधिकारी द्वारा किए जाने के बाद मड़ियाहूं तहसील के अधिवक्ताओं को शकुन मिला है। हम अधिवक्ताओं के आंदोलन की जीत इसलिए नहीं बता रहे हैं की दरी पर बैठने वाला लेखपाल और विद्वान अधिवक्ताओं की सम्मान का कोई मेल ही नहीं है। लेकिन विद्वान अधिवक्ताओं पर अभद्र टिप्पणी करने वाले लेखपाल को हटाने के लिए 15 दिन का समय लग गया। अधिवक्ता मड़ियाहूं तहसील के नवागत एसडीएम सुनील कुमार भारती तक अवगत कराया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अंत में तहसील के अधिवक्ताओं को जाकर जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र को मामले से अवगत कराकर संज्ञान में लाया गया तब जाकर कार्रवाई हुई। इससे स्पष्ट है कि मड़ियाहूं तहसील में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच चुका है। सोचने वाली बात है एक लेखपाल को अधिकारी, कर्मचारी बचाने में लगा हुआ था। ऐसा लगता है कि आने वाला दिन तहसील की हालत भ्रष्टाचार रूपी रावण से और भी बलशाली होगा और अधिवक्ताओं को इस भ्रष्टाचार रूपी रावण से लड़ने के लिए कड़े कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ेगा तभी अधिवक्ताओं का मान और सम्मान बचेगा।

फोटो- लेखपाल के व्हाट्सएप स्टेटस का वायरल कॉपी

यह समाचार अधिवक्ता एवं पीड़ित काश्तकार सूत्रों पर आधारित है इससे बीआरसी 24 न्यूज़ का कोई लेना देना नहीं है।

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