शीतला प्रसाद सरोज मुंबई
MUMBAI. प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 20 वीं किस्त जारी होने के उपलक्ष्य में अंधेरी (पश्चिम) स्थित यारी रोड के केन्द्रीय मात्स्यिकी शिक्षा संस्थान (ICAR-CIFE) हॉल में ‘मन की बात मछुआरों के साथ’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केन्द्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान के मत्स्य अर्थशास्त्र, विस्तार और सांख्यिकी प्रभाग की ओर से किया गया था।

इस विशेष कार्यक्रम में मछली पालक किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली सुविधाओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने किसानों के हित में केंद्र सरकार की योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा, “प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए एक वरदान है। इस योजना के तहत साल भर में ₹6,000 सीधे किसानों के खाते में भेजे जाते हैं, जिससे किसान आत्मनिर्भर बन रहे हैं और उनकी उत्पादकता भी बढ़ी है।”
आठवले ने मछुआरों को किसान का दर्जा दिए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में मछुआरों को यह मान्यता प्राप्त है। उन्होंने मछुआरों की कठिनाइयों की चर्चा करते हुए कहा, “आज आदमी पकड़ना आसान है, लेकिन मछली पकड़ना आसान नहीं। मछली व्यवसाय से जुड़े लोगों की समस्याएं मुझे ज्ञात हैं और केंद्र सरकार उन्हें दूर करने के लिए लगातार प्रयासरत है।”
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि भारत आज दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और 2027 तक यह पहले स्थान पर आ सकता है।
कार्यक्रम में मछली व्यवसायी और कोली समुदाय के प्रतिनिधि राजहंस टपके ने कोली समाज को भारत की सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता देने की मांग करते हुए कहा कि महाराष्ट्र की तरह राष्ट्रीय स्तर पर भी मछुआरों को किसान का दर्जा दिया जाए। टपके ने पीएम किसान, एमएसपी और ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाओं का लाभ मछुआरों तक पहुँचाने की वकालत की।
इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले द्वारा ICAR-CIFE द्वारा प्रकाशित कई पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। साथ ही मछुआरिन महिलाओं को स्वच्छता सामग्री (डस्टबीन) वितरित की गई।
कार्यक्रम के संयोजक और नोडल अधिकारी डॉ. स्वदेश प्रकाश तिवारी ने भारत के मत्स्य क्षेत्र की सेवा में नवाचार, समावेशिता और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. पारमिता बनर्जी सावंत ने किया।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में वर्सोवा, जुहू, मढ़, मालवणी, मरोल आदि मत्स्य गांवों के लोग उपस्थित थे।
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