MARIYAHU. जौनपुर जिले के मड़ियाहू नगर के मिर्दहा मोहल्ले में स्थित चंडिका माता मंदिर पर कुछ अवसरवादियो द्वारा चंडिका माता मंदिर के नाम से चोरी छिपे ट्रस्ट बनाने का विरोध थमता नजर नहीं आ रहा है। नगर पंचायत के सभासदों के बाद सोमवार को नगर के दो समाजसेवियों ने सामने आकर सब रजिस्ट्रार को ट्रस्ट बनाने की अनुमति नहीं देने के लिए कागजी कार्रवाई पूरा किया है।
आपको बता दे की नगर के मिर्दहा मोहल्ले में स्थित चंडिका माता मंदिर वर्तमान समय में सरकार के अभिलेखों में पर्यटन स्थल के रूप में बढ़ावा देने के लिए एक धार्मिक स्थल के रूप में जाना जा रहा है जिसके लिए 188.29 लाख रुपए मंदिर के जीणोद्धार एवं सुंदरीकरण के लिए नगर पंचायत के प्रयास से अवमुक्त है और मंदिर पर सुंदरीकरण का कार्य भी तेजी के साथ चल रहा है।
इसी बीच मंदिर को अपना निजी संपत्ति बनाने के लिए कुछ अवसरवादी लोग चंडिका माता मंदिर के नाम से ट्रस्ट बनाने की योजना तैयार किया। और चार दिन पहले मड़ियाहूं तहसील स्थित सब रजिस्टार दफ्तर में पहुंचकर रजिस्ट्रेशन भी करवाने की पहल शुरू किया जिसकी भनक नगर के कुछ सभासदों को हो गई, इसके बाद काफी संख्या में सभासदों ने पहुंचकर सब रजिस्टार दफ्तर पर विरोध किया। नगर पंचायत अधिशासी अधिकारी चंदन सिंह गौड़ ने भी जिलाधिकारी समेत मुख्यमंत्री तक इसकी जानकारी भेजा तब जाकर अवसरवादियो द्वारा ट्रस्ट बनाने का सपना चूर चूर हो सका। और दफ्तर से अपनी कागजात लेकर धीरे से रफू चक्कर हो गए।
सोमवार को नगर के समाजसेवी रवि केसरी एवं नागेश निगम ने भी ट्रस्ट बनाने वालों का विरोध करते हुए आगे आए और दोपहर में सब रजिस्टार के यहां कागजी कार्रवाई पूरा करते हुए शिकायत किया कि नगर में कुछ लालची एवं बेईमान प्रवृत्ति की लोगों की नजर मंदिर की संपति एवं जमीनों पर पड़ गई है और नाजायज लाभ लेने की गरज से मंदिर की भूमि को आवासी प्लाटिंग करने की नियत रखते हुए फर्जी ढंग से चंडिका धाम या मंदिर के नाम से ट्रस्ट बनवाना चाहते हैं। यह वही लोग हैं जो कस्बे में स्थित पूर्व के मंदिरों पर भी विवाद कर चुके हैं। चंडिका देवी मंदिर का रवि केसरी उपप्रबंधक और जबकि नागेश निगम को प्रबंधक बताया है। उन्होंने हवाला दिया कि इस बात का वर्ष 1990 से सिविल न्यायालय जज जु.डि. मंदिर बनाम मजीद वगैरह के नाम से मुकदमा बिचाराधीन है जिसमें विस्तृत जानकारी दी गई है। माननीय न्यायालय द्वारा उक्त मुकदमा के बाबत स्थगन भी अनवरत जारी है। इसलिए कोई भी रजिस्ट्रेशन करना विधि विरुद्ध और न्यायालय की अवमानना होगी।
इस संबंध में वादी मुकदमा रवि केसरी ने बताया कि किसी भी कीमत पर सार्वजनिक चंडिका माता मंदिर को किसी की व्यक्तिगत संपति अथवा ट्रस्ट नहीं बनने दिया जाएगा।
फोटो- चंडिका माता मंदिर प्रांगण
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