राजेंद्र प्रसाद विश्वकर्मा रिपोर्टर
जौनपुर। मुफ्तीगंज विकास खंड के स्थानीय बाजार में अल्ट्रासाउंड डाक्टर मरीजों की जीवन के साथ खिलवाड़ करने से बाज नहीं आ रहे हैं जिसके कारण अल्ट्रासाउंड का गलत रिपोर्ट देने से मरीज अपना हजारों रुपया और जीवन गवां बैठ रहा है। सीएमओ के अनदेखा करने से अल्ट्रासाउंड डॉक्टर छोटे-मोटे बाजारों में मरीज को लूट रहे हैं।

बताया जाता है कि मुफ्तीगंज के रामपुर पित्तुपुर निवासी रामफेर विश्वकर्मा की पुत्री माधुरी देवी का इलाज स्थानीय सीएचसी में कराया जा रहा था। सीएचसी के डॉक्टर अनुसार उसके शरीर में कोई कमी थी। डॉक्टर ने उसका अल्ट्रासाउंड करने की सलाह दिया। इसके बाद रामफेर विश्वकर्मा पुत्री को लेकर मुफ्तीगंज स्थित देव अल्ट्रासाउंड सेंटर पर गए। बताते हैं कि यह सेंटर मुफ्तीगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का खास अल्ट्रासाउंड सेंटर है जहां डॉक्टर प्रतिदिन कई मरीजों का अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भेजते हैं।
आरोप है कि13 जुलाई 2026 को देव अल्ट्रासाउंड सेंटर पर महिला डाक्टर नेहा गुप्ता ने अल्ट्रासाउंड कर रिपोर्ट दिया कि ओबरी में गांठ है। रिपोर्ट सीएचसी के डाक्टर अश्वनी पाल ने देखा तो बताया कि अल्ट्रासाउंड में डाक्टर ने गांठ बताया है इसका आपरेशन करवाना पड़ेगा। लगे हाथ सलाह दिया कि ऑपरेशन में डा लालबहादुर सिद्धार्थ ठीक रहेंगे और तुरंत उन्होंने फोन से बात कर मरीज को वहां भेज कर एडमिट करवाया। बेटी के पिता की माना जाए तो डाक्टर सिद्धार्थ ने मरीज का इलाज करते हुए लगभग 30 हजार ले लिया। उसके बाद अपने यहां अल्ट्रासाउंड करवाया रिपोर्ट में बताया कि गांठ नहीं, पानी है। इसके बाद बेटी के साथ आए पिता घबरा गया इस बार खर्च लाखों होना था।
घबराकर पिता ने डॉक्टर सिद्धार्थ के अस्पताल से बेटी को डिस्चार्ज करवाया और दूसरे डाक्टर के पास ले गए। उक्त डॉक्टर ने एक डाइग्नो सेन्टर पर भेज कर जांच करवाया। वहां भी जांच रिपोर्ट में पानी ही निकला। बार-बार रिपोर्ट बदलती गई और बेटी के लिए पिता बदहवास होता गया। अब पिता को समझ में नहीं आ रहा है कि जिले में किस डॉक्टर से इलाज करवाया जाय जो सही रिपोर्ट दे और उसकी जान बच सके।
जनपद में ऐसे अल्ट्रासाउंड के डिग्रीधारी डाक्टर गलत रिपोर्ट देकर मरीजों के जिन्दगी के साथ कब तक खिलवाड़ करते रहेंगे और मरीज के लिए तीमारदार कब तक बर्बाद होते रहेंगे यह सोचने की बात है। ऐसा लगता है की इन अप्रशिक्षित डिग्री धारकों के ऊपर शासन प्रशासन का कोई अंकुश नहीं है। मुफ्तीगंज एवं आसपास की लोग अब कहने लगे हैं कि जिले की चिकित्साधिकारी की मेहरबानी से अल्ट्रासाउंड के अप्रशिक्षित डॉक्टर खूब फल फूल रहे।
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