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जौनपुर। कुशीनगर के शेरे पूर्वांचल पहुंचे मड़ियाहूं और पायलट बनी जारा बिटिया को दिया अपना आशीर्वाद

जौनपुर। जिले में सात समंदर पार कर अमेरिका की सरजमी से लौटकर भारत के शिराजेहिंद की सरजमी पर पहुंची मड़ियाहूं नगर की पायलट बिटिया फलक सामिया उर्फ जारा फारुकी की हौसले की उड़ान को यादगार पल बनाने के लिए मड़ियाहू नगर के गढ़ई मोहल्ला में रविवार की शाम विशाल सहभोज का आयोजन किया गया। यह आयोजन नगर अध्यक्ष रुकसाना कमाल फारुकी ने किया। सहभोज को खुशनुमा बनाने के लिए कुशीनगर की सरजमीं से पधारे शेरे पूर्वांचल के नाम से विख्यात किसानों के मसीहा समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता एवं संस्थापक सदस्य एवं छोटी लोहिया कहे जाने वाले जनेश्वर मिश्र के सहपाठी सपा के पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह ने भी पहुंचकर बिटिया जारा को अपना आशीर्वाद दिया।
इस मौके पर सपा के पूर्व मंत्री शेरे पूर्वांचल राधेश्याम सिंह ने बताया कि जारा फारूकी हमारे मित्र कमाल अख्तर फारूकी की बिटिया है उन्होंने अमेरिका जैसी सरजमीं पर पहुंचकर पायलट जैसी कठिन ट्रेनिंग को पास किया मेरा आशीर्वाद है कि बिटिया इसी तरह तरक्की करती रहे।

फोटो- शेरे पूर्वांचल राधेश्याम सिंह को बूके देकर स्वागत करती नगर अध्यक्ष रुकसाना कमाल फारुकी

कुशीनगर के शेरे पूर्वांचल राधेश्याम सिंह कैसे बने
कुशीनगर में उपनगर स्थित त्रिवेणी चीनी मिल गेट पर गन्ना मूल्य बढ़ाने व बकाया भुगतान को लेकर किए जा रहे आंदोलन के दौरान 10 सितंबर 1992 को गोली कांड हुआ जिसमें पड़ोही और जमादार मियां शहीद हो गए। जिससे भारी किसाने की जन आंदोलन शुरू हुआ।
तत्कालीन भाजपा सरकार में चीनी मिल प्रशासन की मनमानी से तंग आकर क्षेत्र के किसानों ने अगस्त 1992 में किसान नेता राधेश्याम सिंह की अगुवाई में चीनी मिल गेट पर आंदोलन शुरू किया तो धीरे-धीरे अगल-बगल के गांवों से लोग जुटने लगे। आठ सितंबर को चीनी मिल प्रशासन और आंदोलन कर रहे किसानों के बीच वार्ता विफल हुई तो आंदोलन और उग्र हो गया। आंदोलन की धमक लखनऊ तक पहुंची तो तत्कालीन जनपद देवरिया के जिलाधिकारी पर किसानों को मनाने का दबाव बढ़ने लगा। नौ सितंबर को प्रशासनिक अधिकारियों व चीनी मिल प्रशासन के साथ राधेश्याम सिंह से वार्ता शुरू हुई जो देर शाम तक चली।

फोटो-पायलट बनी जारा बिटिया शेरे पूर्वांचल राधेश्याम सिंह का स्वागत करती हुई

आंदोलन की अगुवाई कर रहे राधेश्याम सिंह किसी कीमत पर किसानों के हितों से समझौता करने को तैयार नहीं थे। वार्ता विफल होने के बाद आंदोलनकारियों ने चीनी मिल प्रबंधक को बंधक बनाकर आंदोलन स्थल पर बैठा लिया। उन्होंने शर्त रखी कि जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी, प्रबंधक हमारे साथ बैठे रहेंगे। इसकी जानकारी जब क्षेत्र के किसानों को हुई रामकोला कस्बा में 10 हजार से अधिक किसान जुट गए। इसके बाद प्रशासन ने रणनीति बदली और थाने में बैठकर राधेश्याम सिंह से वार्ता करने को कहा। चीनी मिल गेट से कुछ किसानों के साथ राधेश्याम थाने में आए और वहां अधिकारियों ने आंदोलन खत्म करने का अनुचित दबाव बनाने लगे। इसकी जानकारी किसानों को हुई तो वह उग्र हो गए और पुलिस पर पथराव कर दिया। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने फायरिंग की और 10 सितंबर को दो किसानों की मौत हो गई। राधेश्याम सहित करीब 250 किसानों को गिरफ्तार कर देवरिया जेल में डाल कस्बे में क‌र्फ्यू लगा दिया गया। गोलीकांड की गूंज दिल्ली और लखनऊ तक पहुंची तो बड़े नेताओं के आने का क्रम शुरू हो गया। अगले वर्ष राधेश्याम सिंह द्वारा किसानों की शहादत पर आयोजित किसान शहीद दिवस में आए मुलायम सिंह यादव ने सपा के कद्दावर नेता राधेश्याम सिंह को शेरे पूर्वांचल नाम के खिताब की घोषणा की। तबसे पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह को शेरे पूर्वांचल कहा जाने लगा।

फोटो- पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह का स्वागत करते समाजसेवी कमाल अख्तर फारुकी

समाजवादी पार्टी के मुखिया ने किसानों के बीच क्या किया ऐलान
समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह ने पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह को शेरे पूर्वांचल की खिताब से नवाजे जाने के बाद किसानों के लिए एक और ऐलान किया जिसमें उन्होंने कहा कि यहां प्रतिवर्ष होने वाले किसानों की शहादत मेले में मेरे परिवार का एक सदस्य शामिल होगा। अब तक इस कार्यक्रम में सपा मुखिया के भाई शिवपाल सिंह यादव, उनके पुत्र अखिलेश यादव प्रति वर्ष शामिल होते हैं।

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