जौनपुर। जिले के मड़ियाहूं तहसील के कटघर में स्थित हरिपाल पैलेस पर सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा एवं ज्ञान गंगा यज्ञ कथा का श्रोता रसपान कर रहे है। बुधवार को तीसरे दिन काशी से पधारे कथा वाचक श्री हरि ओम महाराज ने श्रोताओं के बीच कथा का रसपान कराते हुए हिरण कश्यप और नरसिंह भगवान के रूप में श्री नारायण का कथा सुनाया जिसको सुनकर श्रोता मंत्र मुग्ध रहे।

श्रीमद् भागवत कथा महापुराण का आयोजन हरिपाल पैलेस के मालकिन मुंबई के भाजपा नेत्री सुषमा सिंह एवं उनके पति इंजीनियर प्रेमशंकर सिंह ने किया है।

इसका शुभारंभ 17 मई को विशाल कलश यात्रा के साथ की गई थी। जिसमें पीले परिधानों में सुषमा सिंह एवं प्रेम शंकर सिंह समेत काफी संख्या में भक्तगण महिला एवं पुरुष शामिल हुए।

बुधवार को श्रीमद् भागवत कथा को आगे बढ़ाते हुए कथा व्यास श्री हरिओम महाराज जी ने हिरण कश्यप और नरसिंह भगवान के कथा को भक्त और भगवान के प्रेम को श्रोताओं के बीच सुनाते हुए कहा कि इस कथा में अहंकार पर भक्ति की जीत और भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार होना सनातन की एक जीत है।

उन्होंने उपस्थित श्रोताओं को बताया कि
सत्ययुग में महर्षि कश्यप और दिती के दो पराक्रमी पुत्र हुए—हिरण्यकशिपु और हिरण्याक्ष। हिरण्याक्ष का वध भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर किया था। भाई की मृत्यु से क्रोधित होकर हिरण्यकशिपु ने विष्णु को अपना परम शत्रु मान लिया और उनसे प्रतिशोध लेने की ठान ली।
इसके लिए हिरण्यकशिपु ने मन्दराचल पर्वत पर घोर तपस्या की तपस्या से खुश होकर ब्रह्मा जी प्रकट हुए और उनसे वरदान मांगा कि वह ब्रह्मा जी द्वारा बनाए किसी भी जीव, मनुष्य, पशु, देवता या असुर द्वारा न मारा जा सके। उसकी मृत्यु न घर के भीतर हो और न बाहर। वह न दिन में मरे और न रात में, वह न अस्त्र से मारा जा सके और न शस्त्र से, न पृथ्वी पर उसका अंत हो और न आकाश में। ब्रह्मा जी ने हिरण कश्यप को वरदान दे दिया।

इस वरदान को पाकर वह अत्यंत अहंकारी हो गया और स्वयं को ही भगवान घोषित कर दिया। उसने अपने राज्य में विष्णु पूजा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया।
भक्त प्रह्लाद का हुआ जन्म और उस पर अत्याचार की कथा को आगे बढ़ते हुए महाराज जी ने कहा हिरण्यकशिपु की पत्नी कयाधु ने एक पुत्र को जन्म दिया, जिसका नाम प्रह्लाद रखा गया। जब प्रह्लाद गर्भ में थे, तब माता कयाधु देवर्षि नारद के आश्रम में रहती थीं, जहाँ उन्होंने भगवान विष्णु की महिमा सुनी थी। इस कारण प्रहलाद जन्म से ही परम विष्णु भक्त निकले। जब हिरण्यकश्यप को पता चला कि उसका अपना पुत्र ही उसके परम शत्रु नारायण की पूजा करता है, तो वह क्रोध से पागल हो उठा। उसने प्रहलाद को समझाने के कई प्रयास किए, लेकिन जब प्रह्लाद नहीं बदले, तो उसने अपने ही पुत्र को मारने की कई योजनाएं तैयार किया कभी पहाड़ से भी गिरवाया तो कभी शस्त्र से मरवाने का प्रयास किया यहां तक की अपनी बहन होलिका से आग से जलवाने का प्रयास किया लेकिन होलिका जल गई विष्णु भक्त प्रहलाद श्री नारायण का नाम लेते हुए बच गया। उसके बाद हिरण्कश्यप ने अपने बेटे को खुद मारने की योजना बनाई और एक दिन संध्या काल में उससे पूछा कि तुम्हारा विष्णु कहां है देखता हूं तुम्हारी मौत कैसे रोक पाता है तो प्रहलाद ने कहा कि कड़कड़ में विष्णु है तो उसने पूछा क्या खंबे में भी विष्णु है तो प्रहलाद ने कहा खंबे में भी भगवान है, विष्णु है इसके बाद हिरणकश्यप के सामने ही खंबे में तेज आवाज हुई और खंभा टूटा तो उसमें नरसिंह रूप में श्री हरि प्रकट हुए उसने हिरण कश्यप को घर के देहरी पर ले जाकर अपने जांघ पर लिटा दिया और बोला की मुझे पहचानो ना मैं नर हूं न शेर हूं ना मेरे पास कोई शस्त्र है ना कोई मेरे पास अस्त्र है ना मैं पृथ्वी पर हूं और ना मैं आकाश में हूं, अंतिम समय में अपने अहंकार को हिरणकश्यप ने नष्ट किया और भगवान श्री हरि ने उनके पेट को फाड़ कर लहू को पीकर मृत्यु प्रदान किया। जब हरि ने प्रहलाद से पूछा की तुम्हारे पिता को किस प्रकार की मृत्यु चाहिए तो उसने कहा कि यह मेरे पिता है श्री हरि को पहचान नहीं पाये है इसलिए इन्हें मोक्ष प्रदान किया जाए प्रहलाद के अनुसार श्री हरि ने हिरणकश्यप को मोक्ष प्रदान किया।
श्रीमद् भागवत कथा सुनने के लिए हरिपाल पैलेस का प्रांगण भक्तों एवं श्रोताओं से खचाखच भरा रहा। इस दौरान सुषमा एवं प्रेम शंकर सिंह द्वारा कथा में दूर दराज से आ रहे अतिथियों का अंग वस्त्र से स्वागत कर पुण्य का भागीदार बन रहे हैं।
इस मौके पर रमाशंकर चौरसिया भाजपा मंडल अध्यक्ष राजेश जायसवाल, अनिल दुबे, पूर्व प्रधानाचार्य सूर्यभान सिंह, मुंबई से पधारे पत्रकार शीतला प्रसाद सरोज समेत काफी संख्या में भक्तगण मौजूद रहे। कथा में आए अतिथिगणों एवं भक्तगणों की व्यवस्था भाजपा नेत्री सुषमा सिंह के भाई राजू सिंह कर रहे हैं।
BRC24NEWS अब खबर दिखेगी