जौनपुर। जिले की रामपुर नगर पंचायत रामपुर स्थित ऐतिहासिक धनुहा मेला मैदान की बेशकीमती भूमि पर कथित अवैध कब्जे और निर्माण कार्य को लेकर क्षेत्र में विवाद गहराता जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि करोड़ों रुपये मूल्य की सार्वजनिक भूमि पर भू-माफियाओं द्वारा धीरे-धीरे कब्जा किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र की ऐतिहासिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
क्षेत्रवासियों के अनुसार धनुहा मेला मैदान दशकों से रामपुर क्षेत्र की पहचान रहा है। यहां प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला ऐतिहासिक मेला न केवल स्थानीय लोगों की आस्था का केंद्र है, बल्कि आसपास के कई जनपदों से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं और व्यापारियों का प्रमुख आकर्षण भी है। लोगों का कहना है कि यह भूमि राजस्व अभिलेखों में मेला मैदान के रूप में दर्ज है और सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखी गई है। ऐसे में इस भूमि पर किसी भी प्रकार का निजी निर्माण क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को नुकसान पहुंचाने वाला कदम साबित हो सकता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा मेला मैदान की भूमि को धीरे-धीरे अपने कब्जे में लिया जा रहा है। उनका कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में मैदान का क्षेत्रफल लगातार सिमटता गया है और अब निर्माण कार्य शुरू होने से लोगों की चिंता और बढ़ गई है। नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले वर्षों में ऐतिहासिक मेले का अस्तित्व ही खतरे में पड़ सकता है।
वहीं दूसरी ओर निर्माण कार्य करा रहे पक्ष ने आरोपों को खारिज करते हुए दावा किया है कि संबंधित भूमि उनकी निजी संपत्ति है। उनका कहना है कि भूमि की वैध रजिस्ट्री उनके नाम दर्ज है तथा राजस्व विभाग द्वारा विधिवत सीमांकन (पैमाइश) कराए जाने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया गया है। उनका यह भी कहना है कि वे कानून के दायरे में रहकर निर्माण करा रहे हैं और किसी सार्वजनिक भूमि पर कब्जा नहीं किया गया है।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब नगर पंचायत प्रशासन ने सीमांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए। नगर पंचायत रामपुर के अधिशासी अधिकारी (ईओ) कुँवर गौरव सिंह ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि राजस्व विभाग द्वारा भूमि की पैमाइश की गई, लेकिन इस प्रक्रिया की सूचना नगर पंचायत को नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि यदि संबंधित भूमि नगर पंचायत के अधिकार क्षेत्र में आती है तो सीमांकन के दौरान नगर पंचायत की उपस्थिति और सहमति आवश्यक थी।
ईओ ने बताया कि पूरे प्रकरण से उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है और मामले की जांच की मांग की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) मड़ियाहूं से बातचीत हुई थी, जिन्होंने निर्माण कार्य रुकवाने का आश्वासन दिया था। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासनिक स्तर पर आश्वासन दिए जाने के बावजूद निर्माण कार्य जारी है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि भूमि के वास्तविक स्वामित्व, सीमांकन प्रक्रिया तथा निर्माण कार्य की वैधानिकता की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उनका कहना है कि यदि भूमि सार्वजनिक संपत्ति है तो उस पर हुए किसी भी अवैध कब्जे को तत्काल हटाकर मेला मैदान को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि धनुहा मेला मैदान केवल एक खाली भूमि नहीं बल्कि क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान है। यहां दो दिवसीय ऐतिहासिक मेले के दौरान लाखों लोगों की भीड़ उमड़ती है। यदि इसी तरह अतिक्रमण और कब्जे का सिलसिला जारी रहा तो भविष्य में मेले के आयोजन के लिए पर्याप्त स्थान नहीं बचेगा और यह ऐतिहासिक परंपरा विलुप्त होने की कगार पर पहुंच सकती है।
फिलहाल इस पूरे मामले ने नगर पंचायत, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं। लोगों का कहना है कि यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राजस्व विभाग और प्रशासन कब तक इस विवाद पर स्पष्ट स्थिति सामने लाते हैं और क्या वास्तव में धनुहा मेला मैदान की भूमि को अतिक्रमण से बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।
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