जौनपुर। सरपतहा थाना क्षेत्र के मयारी गांव की विधवा मां केवला देवी की आखिरी उम्मीद भी एक सड़क हादसे ने छीन ली। ड्यूटी पर जाते समय कार की टक्कर से घायल हुए बीएचएमएस के छात्र विकास प्रजापति ने लखनऊ केजीएमयू में पखवाड़े तक जिंदगी की जंग लड़ने के बाद दम तोड़ दिया। बीती रात दो बजे जब शव गांव पहुंचा तो मां और परिजनों की चीख-पुकार से पूरा गांव गमगीन हो गया।
28 वर्षीय मृतक विकास पं.जवाहरलाल नेहरू राजकीय होमियोपैथिक मेडिकल कॉलेज कानपुर से बीएचएमएस कर वहीं इंटर्नशिप कर रहा था। वर्ष 2019 में पिता सालिकराम प्रजापति की मौत के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी विकास के कंधों पर आ गई थी। उसने मां और चचेरे परिजनों के साथ मिलकर तीन बहनों की शादी कराई। चौथी और सबसे छोटी बहन रीशू की शादी की जिम्मेदारी अभी बाकी थी। आर्थिक तंगी के चलते वह कानपुर के एक निजी अस्पताल में नौकरी कर पढ़ाई का खर्च और घर भी चलाता था।
विगत 17 मई को अपराह्न साढ़े तीन बजे विकास बाइक से अस्पताल ड्यूटी पर जा रहा था। कानपुर के कल्याणपुरी इलाके में तेज रफ्तार कार ने उसे टक्कर मार दी। हादसे में वह बाइक समेत नाले में जा गिरा। लगभग 20 मिनट तक बेहोश रहने के बाद राहगीरों ने उसे कानपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचाया। वहां प्राथमिक उपचार के बाद फिर उसे वापस हास्टल भेज दिया गया। लेकिन उसी रात हालत बिगड़ने पर साथी मेडिकल छात्रों ने दोबारा अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से डॉक्टरों ने गंभीर हालत में लखनऊ केजीएमयू रेफर कर दिया। वहां करीब दो सप्ताह तक वेंटिलेटर पर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करने के बाद शनिवार देर रात विकास ने अंतिम सांस ली। सूचना पर परिजन लखनऊ पहुंचे और रात लगभग 2 बजे शव लेकर गांव आए। इकलौते बेटे का शव देखते ही मां केवला देवी बेसुध होकर गिर पड़ीं। अब किसके सहारे जिऊंगी… मेरा डॉक्टर बेटा कहां चला गया कहकर वह बार-बार बेहोश हो रही थीं।
रविवार सुबह क्षेत्र पंचायत सदस्य प्रशांत पाण्डेय व ग्रामीणों के सहयोग से इब्राहिमपुर घाट पर गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया। विकास की मौत से न सिर्फ एक मां का सहारा छिना है, बल्कि चार बहनों के सिर से भाई का साया भी उठ गया। गांव में हर कोई विकास के संघर्ष और जिम्मेदारी की मिसाल दे रहा था। एक होनहार डॉक्टर की असमय मौत से पूरा क्षेत्र स्तब्ध है।
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