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फोटो- मड़हा उजाड़ने के बाद खुले आसमान के नीचे जानवर

जौनपुर। न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बीच पीड़ित का आशियाना उजाड़ने का आरोप, रामपुर थाने में देर शाम तक बैठे रहे पिता-पुत्रियां

जौनपुर। मड़ियाहूं तहसील के रामपुर थाना क्षेत्र के ग्राम सभा कोदैला में गुरुवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब तहसीलदार मड़ियाहूँ रवि रंजन के नेतृत्व में राजस्व टीम दोपहर करीब दो बजे गांव पहुंची। रामधारी प्रजापति के परिवार का आरोप है कि राजस्व टीम ने बिना पूर्व सूचना दिए उनके वर्षों पुराने रहायशी मड़हे और पशुओं के रहने के लिए बनाए गए आशियाने को हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। परिवार का यह भी आरोप है कि कार्रवाई के दौरान उनके द्वारा लगाए गए नीम, आम सहित अन्य फलदार वृक्षों को भी विपक्षी पक्ष के लोगों से कटवा दिया गया।

फोटो- पुलिस और राजस्व टीम के सामने लगाई गई मड़हे में आग

*राजस्व टीम पर बिना पूर्व सूचना कार्रवाई करने का आरोप, पेड़ कटवाने और मड़हे में आग लगाकर गाय भैंस को भगाने का भी दावा; परिवार ने डीएम से निष्पक्ष जांच की मांग की*
परिवार के मुताबिक, जिस भूमि पर रामधारी प्रजापति का परिवार रह रहा था, उसकी रजिस्ट्री पूर्व में कराई गई थी। इसके बाद से परिवार उक्त भूमि पर रहकर अपना जीवन-यापन करता आ रहा था। भूमि को लेकर रामधारी प्रजापति और विपक्षी राम शिरोमणि प्रजापति के बीच काफी समय से विवाद चल रहा है।

फोटो- मौके पर थाने के सब इंस्पेक्टर मनजीत कुमार

बंटवारे की कार्रवाई के खिलाफ न्यायालय में मामले विचाराधीन
रामधारी प्रजापति के परिजनों का कहना है कि भूमि विवाद के संबंध में उपजिलाधिकारी मड़ियाहूँ के स्तर से बंटवारे की कार्रवाई की गई थी। परिवार के अनुसार, उक्त कार्रवाई के विरुद्ध सिविल न्यायालय जौनपुर तथा जिलाधिकारी जौनपुर के न्यायालय में मामले विचाराधीन हैं।
परिवार का दावा है कि जब भूमि से संबंधित विवाद अभी न्यायालयों में लंबित है, ऐसे में राजस्व टीम द्वारा मौके पर पहुंचकर उनके रहायशी आशियाने को हटाने की कार्रवाई किए जाने से वे हैरान हैं।

फोटो- सूता लगाकर जबरदस्ती बटवारा करने का आरोप

‘बेदखली का कोई न्यायालयी आदेश नहीं’, परिवार ने उठाए सवाल
पीड़ित परिवार ने दावा किया है कि रामधारी प्रजापति अथवा उनके परिवार को उक्त भूमि से बेदखल करने के संबंध में किसी न्यायालय द्वारा कोई बेदखली अथवा निष्कासन आदेश पारित नहीं किया गया है। परिवार का सवाल है कि यदि ऐसा कोई न्यायालयी आदेश नहीं था तो राजस्व टीम ने किस आदेश या विधिक आधार पर उनके आशियाने को हटाने की कार्रवाई की।
परिजनों ने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों द्वारा मौके पर की गई कार्रवाई के आदेश और उसके विधिक आधार को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।
पिता और दो बेटियों को थाने ले जाने का आरोप
परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान रामधारी प्रजापति और उनकी दो बेटियों को तहसीलदार के कहने पर रामपुर थाने ले जाया गया, जहां उन्हें देर शाम तक तब तक बैठाए रखा गया जब तक उनका आशियाना पूरी तरह उजड़ नहीं दिया गया। परिजनों के मुताबिक, बाद में दोनों बेटियों को छोड़ दिया गया, जबकि रामधारी प्रजापति को देर शाम तक बिना कसूर पुलिस हिरासत में बैठाए रहने की बात कही गई।
हालांकि, पुलिस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक रूप से क्या कार्रवाई की गई और उन्हें किस आधार पर थाने लाया गया, इसकी स्थिति स्पष्ट होना बाकी है। मामले में पुलिस और राजस्व विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

फोटो- मड़हा उजाड़ने के बाद खुले आसमान के नीचे जानवर

लगातार बारिश के बीच आशियाना उजड़ने से परिवार के सामने संकट आ चुकी है। भैंस और गाय आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं। यह अधिकारी जानवरों को भी नहीं बक्शा है।
क्षेत्र में इन दिनों लगातार बारिश हो रही है। ऐसे मौसम में रिहायशी आशियाना हटाए जाने के आरोप से परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। परिजनों का कहना है कि कार्रवाई के बाद उनके सामने अपने परिवार और सामान को सुरक्षित रखने का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
परिवार ने कहा कि भारी बारिश के दौरान प्रशासन लोगों को सुरक्षित रखने और जरूरतमंदों को राहत पहुंचाने के दावा कर रहा है वही ऐसे समय में उनका आशियाना हटाया जाना प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़ा करता है।
पीड़ित परिवरीजन निष्पक्ष जांच की मांग किया है
रामधारी प्रजापति के परिवार ने जिलाधिकारी जौनपुर से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। परिवार की प्रमुख मांगों में मौके पर की गई कार्रवाई के आदेश एवं विधिक आधार की जांच, न्यायालय में लंबित मामलों की स्थिति स्पष्ट होने तक आगे की कार्रवाई पर रोक तथा प्रभावित परिवार को तत्काल राहत उपलब्ध कराना शामिल है।
परिवार का कहना है कि भूमि विवाद से संबंधित मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं और उनके अनुसार कोई बेदखली आदेश भी नहीं है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि राजस्व टीम ने किस आदेश के आधार पर कार्रवाई की।
फिलहाल मामले में राजस्व विभाग और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आशियाना हटाने की कार्रवाई किस आदेश और किस विधिक प्रक्रिया के तहत की गई थी। मामले की निष्पक्ष जांच से ही आरोपों की वास्तविकता और कार्रवाई की वैधानिक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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