जौनपुर। जिले के मड़ियाहूं में आजाद युवा जन कल्याण सेवा समिति की तरफ से हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी शहीद ए आजम भगत सिंह के जन्म जयंती पर उनके स्टैचू पर लोगों ने माल्यार्पण कर उनका जन्म जयंती मनाया गया। जिसमें डॉ. विजय सिंह मौर्य ने कहा कि शहीदे आजम भगत सिंह करीब बारह वर्ष के थे जब जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड हुआ था। इसकी सूचना मिलते ही भगत सिंह अपने स्कूल से 12 मील पैदल चलकर जलियाँवाला बाग पहुँच गए। इस उम्र में भगत सिंह अपने चाचाओं की क्रान्तिकारी किताबें पढ़ कर सोचते थे कि इनका रास्ता सही है कि नहीं ? गांधी जी का असहयोग आन्दोलन छिड़ने के बाद वे गान्धी जी के अहिंसात्मक तरीकों और क्रान्तिकारियों के हिंसक आन्दोलन में से अपने लिए रास्ता चुनने लगे। गाँधी जी के असहयोग आन्दोलन को रद्द कर देने के कारण उनमें थोड़ा रोष उत्पन्न हुआ, पर पूरे राष्ट्र की तरह वो भी महात्मा गाँधी का सम्मान करते थे। पर उन्होंने गाँधी जी के अहिंसात्मक आन्दोलन की जगह देश की स्वतन्त्रता के लिए हिंसात्मक क्रांति का मार्ग अपनाना अनुचित नहीं समझा। उन्होंने जुलूसों में भाग लेना प्रारम्भ किया तथा कई क्रान्तिकारी दलों के सदस्य बने। उनके दल के प्रमुख क्रान्तिकारियों में चन्द्रशेखर आजाद, सुखदेव, राजगुरु इत्यादि थे। काकोरी काण्ड में 4 क्रान्तिकारियों को फाँसी व 16 अन्य को कारावास की सजाओं से भगत सिंह इतने अधिक उद्विग्न हुए कि उन्होंने 1928 में अपनी पार्टी नौजवान भारत सभा का हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसिएशन में विलय कर दिया और उसे एक नया नाम दिया ऐसे ही महान वीर सपूतों को आज देश याद कर रहा है और हम लोग उनकी याद में उनके द्वारा जीवन के विषय में आने वाले युवा पीढ़ी को इसकी जानकारी दी जाती है कार्यक्रम में राजेश सिंह ,मनोज चौरसिया, तालुकदार यादव, संजय जायसवाल, सरदार कंवलजीत सिंह गब्बर, इजहार गुड्डू, राजेंद्र सोनकर, पप्पू बनवासी, शेर बहादुर मौर्य, उत्तम जायसवाल ,अनिल साहू आदि लोग उपस्थित थे।
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