शीतला प्रसाद सरोज मुंबई
MUMBAI. बहन और भाई के स्नेह, आशीर्वाद तथा सुरक्षा के प्रतीक का त्योहार भाई दूज गुरुवार को पूरे हर्षोल्लास एवं पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया।
इसी क्रम में जोगेश्वरी (पश्चिम) के आनंदनगर, न्यू लिंक रोड स्थित भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में बहनों ने भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा, महाराष्ट्र के उपाध्यक्ष एस.एम. खान को तिलक कर आरती उतारी और उनके कल्याण एवं दीर्घायु की मंगलकामना की।

भाई दूज के इस स्नेहिल अवसर पर एस.एम. खान ने सभी बहनों का सम्मान किया और कहा कि, “यह पर्व भारतीय संस्कृति में भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की मर्यादा और परस्पर स्नेह का अद्भुत उदाहरण है। यह परंपरा समाज में प्रेम, एकता और पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ करती है।”

भाई दूज की पौराणिक कथा:
पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान सूर्यदेव और उनकी पत्नी छाया के दो संतानें थीं— यमराज और यमुना। यमुना अपने भाई यमराज से अत्यंत स्नेह करती थीं और बार-बार उन्हें अपने घर आमंत्रित करती थीं। एक दिन, कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यमराज अचानक यमुना के घर पहुँचे।
यमुना ने प्रेमपूर्वक तिलक किया, आरती उतारी और स्वादिष्ट भोजन कराया। यमराज उनकी भक्ति और स्नेह से प्रसन्न होकर वरदान दिया कि जो बहन इस दिन अपने भाई को तिलक कर प्रेमपूर्वक भोजन कराएगी, उसके भाई को दीर्घायु प्राप्त होगी और यमलोक का भय नहीं रहेगा। तभी से भाई दूज पर्व मनाने की परंपरा प्रारंभ हुई।
कृष्ण-सुभद्रा कथा:
दूसरी कथा भगवान कृष्ण और उनकी बहन सुभद्रा से संबंधित है। नरकासुर राक्षस का वध करने के बाद जब भगवान कृष्ण सुभद्रा से मिलने पहुँचे, तो सुभद्रा ने उनका फूलों और मिठाइयों से स्वागत किया तथा उनके माथे पर तिलक लगाया। इसी घटना के आधार पर भी भाई दूज का पर्व मनाने की परंपरा चली आ रही है।
BRC24NEWS अब खबर दिखेगी