MARIYAHU. जौनपुर जिले के मड़ियाहूं तहसील में तैनात रहे एसडीएम कुणाल गौरव का दो सप्ताह पूर्व तबादला हो जाने के बाद शनिवार यानी 21 जून को कर्मचारियों ने विदाई समारोह आयोजित किया। लेकिन उनकी विदाई समारोह का अधिवक्ताओं ने पूर्ण रूप से बहिष्कार किया। जिसके कारण तहसील के सरकारी अधिवक्ता को छोड़ दिया जाए तो एक भी अधिवक्ता विदाई समारोह में नहीं पहुंचे। जिसकी चर्चा कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों में जमकर होती रही।
एसडीएम कुणाल गौरव का किस प्रकार किया गया विदाई समारोह
तहसील सभागार में 21 जून की अपराह्न निवर्तमान एसडीएम कुणाल गौरव का विदाई समारोह नवनियुक्त एसडीएम सुनील भारती की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम में तहसील के अधिकारी व गणमान्य मौजूद रहे। उपस्थित लोगों ने उन्हें पुष्प गुच्छ देकर माल्यार्पण कर स्वागत किया।
एसडीएम कुणाल गौरव अपने विदाई समारोह के दौरान क्या बोले
निवर्तमान उप जिलाधिकारी कुणाल गौरव माइक पकड़ते ही भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि यहां मेरा 22 महीने का कार्यकाल कैसे बीत गया मुझे पता ही नहीं चला। कहा जब साथ काम करने वाले अधिकारी कर्मचारी अच्छे हो तो काम आसान हो जाता है। उन्होंने कहा की समस्याओं के निस्तारण के लिए यहां के लोगों द्वारा किया गया सहयोग हमेशा याद रहेगा। जनता ने हमेशा मेरा सहयोग किया।
एसडीएम की विदाई समारोह पर तहसीलदार क्या बोले
तहसीलदार अजीत कुमार ने दबी जुबान ही सही अथवा मजबूरी में निवर्तमान एसडीएम कुणाल गौरव के कार्यकाल की सराहना करते माइक से देखें गए। लेकिन हकीकत रहा कि जिस दिन तहसीलदार अजीत कुमार ने मड़ियाहूं तहसील में अपना पदभार संभाला उसी दिन तहसीलदार और एसडीएम से जमकर हुई हॉट-टॉक का जमकर वकीलों के बीच में चर्चा रहा। अधिवक्ता सूत्रों की माना जाए तो एसडीएम साहब तहसीलदार अजीत कुमार को फूटी आंख भी नहीं देखना चाहते थे। जिस दिन उनका तबादला हुआ तहसीलदार साहब मक्के की लावे की तरह अंदर ही अंदर फूट रहे थे। इसकी भी चर्चा तहसील में वकीलों के बीच जमकर हो रही थी।
तबादले के 15 दिन बाद क्यों आयोजित हुई विदाई समारोह
तहसील के अंदर वकीलों के बीच चर्चाओं की माना जाए तो एसडीएम कुणाल गौरव साहब चाहते थे कि उसी दिन उनका विदाई समारोह आयोजित हो लेकिन कोई भी अधिवक्ता विदाई समारोह के लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद कर्मचारियों ने उनका बिना पुष्प गुच्छ के ही विदाई कर दिया। उस विदाई में केवल एक वरिष्ठ अधिवक्ता मौजूद रहे। उस दिन से ही कर्मचारियों को बिना पुष्प गुच्छ के विदाई करना नागवार लग रहा था। जिसके कारण 15 दिन बाद शनिवार को एक अधिकारी के कहने पर निवर्तमान एसडीएम को बुलाकर विदाई कार्यक्रम आयोजित करना पड़ा।
एसडीएम के विदाई समारोह में क्यों नहीं पहुंचे अधिवक्ता
एसडीएम कुणाल गौरव की विदाई समारोह में ऐसा नहीं है कि अधिवक्ताओं को आमंत्रित नहीं किया गया था। महामंत्री देवेंद्र त्रिपाठी एवं अध्यक्ष सूर्यमणि यादव को आमंत्रित किया गया था लेकिन एसडीएम द्वारा पूर्व में किए गए व्यवहार को देखते हुए विदाई समारोह के आमंत्रण को यह कहते हुए ठुकरा दिया गया कि जब हमारे समस्त अधिवक्ताओं को आमंत्रित नहीं किया गया तो हम लोग भी नहीं जाएंगे। अध्यक्ष महामंत्री के नहीं जाने के कारण तहसील में मौजूद जो अधिवक्ता बिन बुलाए मेहमान की तरह जाना चाहते थे वह भी अपनी इज्जत बचाते हुए अपने पैर पीछे खींच लिए और तहसील प्रांगण से निकल गए। एक वरिष्ठ अधिवक्ता तो तहसील छोड़कर काशी क्षेत्र निकल गए।
विदाई समारोह के दौरान सरकारी अधिवक्ता सुरेश चंद गुप्ता, नायब तहसीलदार संदीप सिंह , सत्येंद्र मौर्य, राजस्व निरीक्षक रमेश तिवारी, लेखपाल प्रमोद श्रीवास्तव सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
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