विनय कुमार श्रीवास्तव रिपोर्टर वाराणसी
VARANASI(U.P.). यूपी के वाराणसी स्थित सर सुंदरलाल हॉस्पिटल वाराणसी में डॉक्टर एवं कर्मचारियों के तानाशाही और दबंगई के चलते मरीज को साशत झेलनी पड़ रही है। हालत यह है कि शुक्रवार को पुरानी बिल्डिंग की इमरजेंसी में एबीजी काउंटर पर किसी भी कर्मचारी के नहीं होने के कारण मरीज के परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। कार्डियोलॉजिस्ट की किड की जांच के लिए मरीज के परिजनों को घंटो लाइन में खड़े होना पड़ा।

यहां की हालत इतनी खराब है मरीज का तीमारदार जब काउंटर पर पहुंचता है तो वहां पर उपस्थित कर्मचारी मरीज के परिजन को नई बिल्डिंग इमरजेंसी या 100 नंबर पर जाने की बात करके कुर्सी से उठकर चले जाते हैं और अंदर केबिन में बैठकर गुलछर्रे उड़ाते है। जांच के अभाव में इमरजेंसी के डॉक्टर के लापरवाही के कारण कितने मरीज को अपने जान से हाथ धोना पड़ रहा है। कितने मरीज इलाज के अभाव में और रिपोर्ट के अभाव में आए दिन दम तोड़ रहे हैं अथवा वहीं जमीन पर तड़प तड़प कर मृत्यु हो जाती है। मरीजों को तड़पता देख परिजन भी तड़प तड़प कर रोने लगते हैं लेकिन निर्दयी डॉक्टर के ऊपर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में सर सुंदरलाल अस्पताल में दबंग डॉक्टर प्राइवेट ब्लैक कमांडो के सहारे अपना धौंस जमाते रहते हैं। इस दौरान यदि कोई मरीज का परिजन हालत गंभीर होने पर चिल्लाने लगता है तो प्राइवेट ब्लैक कमांडो द्वारा उसे धक्का मार कर बाहर निकाल दिया जाता है। अगर मरीज एबीजी काउंटर पर जाता है तो एबीजी काउंटर पर कोई नहीं मिलता। संयोग से अगर कोई मिल भी जाता है तो कहा जाता है कि 100 नंबर पर जाइए। 100 नंबर जाने पर वहां पर उपस्थित कर्मचारियों द्वारा यह कहा जाता है कि मशीन खराब है। इमरजेंसी में ले जाइए। मरीज के तीमारदार चिल्लाते रहते हैं कि एबीसी ब्लड तत्काल जांच नहीं होता है तो वह ब्लड खराब हो जाता है। लेकिन उनके ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ता। यदि मरीज का परिजन जरा भूल से भी कहा कि जल्दी कर दीजिए मेरे मरीज का हालत बहुत खराब है रिपोर्ट की आवश्यकता है, वहां पर उपस्थित कर्मचारियों द्वारा पर्ची देखकर सीधे जवाब देते हैं की जांच नहीं होगी।

अब आईए सर सुंदरलाल अस्पताल के अंदर ही नई बिल्डिंग की हालात बताते हैं। जहां डॉक्टरों को इमरजेंसी में दिखाया जाता है मरीज के परिजन जैसे डॉक्टर से कहते हैं कि जल्दी मेरे मरीज को देख लीजिए तो डॉक्टर परिजनों को डांट कर भगा देता है।
यदि कोई मरीज का परिजन संबंधित सीएमओ से शिकायत करता है तो डॉक्टर सुधीर कुमार गौतम मरीज के परिजनों से यह कहते हैं कि अपने जिला चिकित्सालय पर क्यों नहीं गए यहां क्यों चले आए। आप अपने जिला चिकित्सालय पर जाइए और मरीज का इलाज बंद कर देते हैं। इसके बाद मरीज का जीवन लीला समाप्त हो जाता है। इमरजेंसी वार्ड में उपस्थित सीनियर डॉक्टर सुधीर कुमार गौतम प्राइवेट ब्लैक कमांडो रखा हुआ है यदि कोई मरीज का परिजन ऊंची आवाज में बोलता है तो प्राइवेट ब्लैक कमांडो परिजनों को धक्का मार कर भगा देता है। सर सुंदरलाल अस्पताल में कितने मरीज के परिजन कैश काउंटर पर दो-दो घंटे लाइन लगाकर खड़े रहते हैं फिर वहां से ब्लड सैंपल जमा करने के लिए घंटों लाइन लगाते है। इस अव्यवस्था के चलते कितने मरीजो का जान चली जाता है। लेकिन डॉक्टर अपने हठधर्मिता में पड़े रहते हैं। सर सुंदरलाल अस्पताल की सारी व्यवस्था केवल दिखावा है बाकी सब यहां पर जो भी कर्मचारी है सब मनमानी तरीके से जब उनकी इच्छा होगी तब आपका वह काम करेंगे नहीं तो आप लाइन में खड़े रहिए।
ओपीडी का पर्ची लेने के लिए भी लोगों को रात भर लाइन लगाना पड़ता है और यहां की स्टाफ के जो भी लोग हैं वह अपने रिश्तेदार के लोगों का डायरेक्ट कैश काउंटर पर भी कैश कर देते हैं। डायरेक्ट ओपीडी का पर्ची भी वह ले लेते हैं बाकी लोग लाइन में लगे ही रहते हैं। सर सुंदरलाल अस्पताल में जिस मरीज की पहचान है उनका ही इलाज संभव है अथवा उनका मौत वहां निश्चित है।
इसकी शिकायत इमरजेंसी अधीक्षक डॉ सुधीर कुमार से फोन द्वारा बीआरसी 24 न्यूज़ के पत्रकार ने अवगत कराया कि विभाग के कर्मचारियों लापरवाही में कार्य कर रहे है तो उन्होंने कहा मेरे यहां कोई लापरवाही नहीं होती है। जब कर्मचारियों को समय मिलेगा तभी काम करेंगे। इमरजेंसी में अधीक्षक की दबंगई के चलते कितने मरीज को आए दिन जान से हाथ होना पड़ रहा है। मरीज जहां डाक्टरों को भगवान मानकर सर सुंदर लाल अस्पताल में जाते हैं वहीं अब उनको हैवान मानने पर मजबूर हो गए।
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