JAUNPUR. जौनपुर जिले की रामपुर थाना में लगातार थानाध्यक्षों को पुलिस कप्तान द्वारा कुर्सी छीन लेने और उन्हें लाइन का रास्ता दिखा दिए जाने का थाना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब तक लगातार थानाध्यक्षों की कार्यकाल की बात करें तो तीन थानाध्यक्ष लाइन हाजिर का रास्ता देख चुके हैं। चर्चा यह भी है कि थाने के अंदर क्षेत्र की एक विशेष जाति के लोगों का वर्चस्व थानाध्यक्ष के लाइन हाजिर होने का अहम कारण बन रहा हैं। देखा जाए तो इस विशेष जाति के चलते तीनों थानाध्यक्ष का कार्यकाल समय के पहले पानी की धार की तरह बह गये है। देखना है कि नवागत थानाध्यक्ष विनोद कुमार इनके वर्चस्व से बच पाते हैं अथवा वह भी उनकी गिरफ्त में आकर लाइन का रास्ता देखते हैं।
अच्छे कार्यकाल के लिए कई थानाध्यक्ष जाने जाते हैं
आपको बता दे की इसके पहले इसी थाना में अश्वनी दुबे, ओम नारायण सिंह, विजय शंकर पटेल, दिव्य प्रकाश सिंह, विक्रम लक्ष्मण सिंह ने अपना कार्यकाल लगभग एक वर्ष से ज्यादा तक क्षेत्र की जनता की सेवा करते और बिना भेदभावपूर्ण न्याय करते हुए व्यतीत किया लेकिन कभी भी थाने के अंदर विशेष जाति का वर्चस्व नहीं होने दिया और जब स्थानांतरण हुआ दूसरे थाने का चार्ज भी संभाला।
पूर्व के थानाध्यक्ष स्थानांतरण के बाद कहां गए
चार्ज की बात करें तो अश्वनीदुबे सिकरारा, विजय शंकर पटेल जलालपुर, ओम नारायण सिंह बक्शा, दिव्य प्रकाश सिंह महराजगंज, विक्रम लक्ष्मण सिंह तेजी बाजार के पुनः थानाध्यक्ष बनाएं गए थे। इन सभी थानाध्यक्षों के विषय में कहा गया कि यह लोग विशेष जाति की चक्कर में ना आकर केवल न्याय की बात करते थे और काम होने के बाद सीधे थाने से बाहर का रास्ता लोगों को दिखाते थे।
विशेष जाति प्रेम में कौन-कौन थानाध्यक्ष हुए लाइन हाजीर
थानाध्यक्ष विक्रम लक्ष्मण सिंह के स्थानांतरण के बाद मनोज पांडेय थानाध्यक्ष बनाए गए। थानाध्यक्ष बनते ही श्री पांडेय के ऊपर विशेष जाति का वर्चस्व कायम होने लगा देखते ही देखते उक्त जाति से ऐसा घिरे की उनके ऊपर उक्त जाति ने ही सुविधा शुल्क लेने का ऐसा आरोप लगाया की विवादित बन गए और उनकी जांच बदलापुर के सीओ द्वारा कराया जाने लगा, उसी समय एक पूर्व विधायक के घर चोरी हो गई जिसमें भी विशेष जाति के लोगों ने अपना दबाव बनाया और उसका खुलासा नहीं कर पाए जिसके कारण उन्हें लाइन हाजिर का रास्ता देखना पड़ा। इसके बाद कार्यवाहक थानाध्यक्ष के रूप में श्री प्रकाश शुक्ला को बनाया गया। थाने पर तैनाती होते ही श्री प्रकाश शुक्ला को क्राइम में अच्छी पकड़ और न्याय के लिए जाना जाने लगा लेकिन यह न्याय थोड़े दिन ही चला और विशेष जाति के लोगों ने श्री प्रकाश शुक्ला के ऊपर अपना वर्चस्व कायम कर दिया जिसके कारण वह भी विवादित के श्रेणी में आ गए और उन्हें भी लाइन का रास्ता देखना पड़ा। इसके बाद पुलिस कप्तान ने देवानंद रजक को थानेदार बनाकर रामपुर थाने का चार्ज दिया। देवानंद रजक का नाम कड़क थानेदार के लिए जनता में मशहूर था जिसके कारण अपनी कड़क कार्यशाली के लिए रामपुर में भी मशहूर हो गए थे। लेकिन पिछले चार माह से देवानंद रजक भी विशेष जाति प्रभाव में आ गए। थाने के अंदर उन्हीं की सुनवाई होती थी जो विशेष जाति के साथ आता था। गरीब, पीड़ित, असहाय कोई भी थाने में आता था बिना विशेष जाति के हस्तक्षेप के मामला का पटाक्षेप नहीं हो पाता था। जिसके कारण तहसील क्षेत्र के एक थाना अंतर्गत स्थित महाविद्यालय के व्यवस्थापक के ऊपर लगे आरोपों पर नहीं करवाई करने के कारण पुलिस कप्तान की कोप भाजन का शिकार होना पड़ा और उन्हें लाइन में जाना पड़ा।
रामपुर थाने की सीसीटीवी कैमरे से विशेष जाति की हो सकती है पहचान
आईए जान लेते हैं कि रामपुर थाने में विशेष जाति की लोगों का किस प्रकार का वर्चस्व है। अगर पुलिस अधीक्षक का मेहनत बेकार नहीं गया होगा तो जिले की सभी थानों में सीसीटीवी कैमरा संचालित कराया गया है।जिसमें रामपुर थाना भी सीसीटीवी कैमरा से लैस है अगर कोई गड़बड़ी नहीं किया गया होगा तो उसमें देखा जा सकता है कि प्रतिदिन 2 से 4 घंटा कुर्सी पर बैठकर वही विशेष जाति के लोग थानाध्यक्ष के इर्द-गिर्द रहते हैं। जो थाने में बैठते हैं यह विशेष जाति के लोगों पर अगर क्राइम की बात करे तो इनके ऊपर आईपीसी 308, 302, 323, 504, 506, 307 समेत कई अन्य गंभीर धारा इनके ऊपर सुशोभित है, जो थाने के अंदर बैठकर महिला उत्पीड़न से लेकर जमीन पर घर बनवाने, घर गिरवाने, मकान का दरवाजा बंद करवाने, जमीन में हिस्सा जबरदस्ती दिलवाने का फैसला थाने के अंदर थानाध्यक्ष के कुर्सी के बगल बैठकर बखूबी करते हैं और थानाध्यक्ष भी इनकी हां में हां मिलाते थे।
देखना है कि नवागत थानाध्यक्ष विशेष जाति वर्चस्व से कितना दूर रहते हैं
गुरुवार को रामपुर थाने का कार्यवाहक थानाध्यक्ष विनोद कुमार बनाए गए और निवर्तमान थानाध्यक्ष देवानंद रजक का पुलिस कर्मियों द्वारा विदाई किया गया। लेकिन थाने के अंदर विदाई समारोह में कोई भी विशेष जाति के लोग नहीं गए। जाते भी कैसे क्योंकि उनका मकसद ही है जाने वाले को सलाम नहीं करते बल्कि आने वाले का स्वागत करते हैं। देखना है कि विनोद कुमार का प्रभाव इस थाना क्षेत्र में जनता और विशेष जाति पर कैसा रहता है। अगर यह भी उक्त जाति के चक्कर में फंस गए तो जनता का भला तो होगा नहीं लेकिन उनका भला जरूर हो जाएगा।
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