जौनपुर। जिले की मड़ियाहूं तहसील के लेखपालों द्वारा उत्कोच लेकर किसानों के जीवन को बर्बाद करने का सिलसिला रुक नहीं रहा है। अधिकारी से शिकायत करने पर भी कोई असर लेखपालों पर नहीं पड़ रहा है। जिससे योगी सरकार में किसान आत्महत्या करने को मजबूर है। लेखपाल है कि अधिकारियों के अनदेखी करने के कारण अपनी जेब भरकर मदमस्त हैं।
ऐसा ही एक वाकया तहसील क्षेत्र के राघव राम पट्टी माफी गांव में शनिवार को संपूर्ण समाधान दिवस में देखने को मिला जैसे ही यह शनिवार को संपूर्ण तहसील समाधान दिवस पर शिकायत पड़ी एसडीम नवीन कुमार की आंखें फटी की फटी रह गई और अपनी गिरेहबान बचाने के लिए शिकायती पत्र को तहसीलदार साहब की तरफ खिसका दिया, तहसीलदार जनाब भी जेब से फोन निकाला और हल्का लेखपाल को हंस-हंसकर समझाने लगे कि यह क्या तुमने कर दिया? ऐसे में तो किसान बर्बाद हो जाएगा मौके पर चले जाओ देख लो ! लेखपाल ने क्या जवाब दिया यह तो पता नहीं लगा लेकिन तहसीलदार ने जो जवाब किसान को दिया उससे साफ जाहिर हो गया कि अब किसान तहसील और उच्चाधिकारियों के दरबार में चप्पल घिसते हुए दिखाई पड़ेगा। फिलहाल तहसीलदार ने कहा कि घर जाओ लेखपाल आपके घर जाएगा और विपक्षी को मना करेगा।

आईए किसान के साथ क्या हुआ यह भी जानकारी देते हैं। तहसील क्षेत्र के रामपुर थाना में राघवराम पट्टी माफी गांव में जहां पर बच्चन मिश्रा पुत्र स्वर्गीय रमाशंकर मिश्रा आबादी की जमीन पर एक किता मकान बनाकर निवास करते है। उस गांव में कभी मनोज यादव नाम का लेखपाल के रूप में तैनात थे इस समय मछलीशहर में अधिवक्ताओं के ऊपर अभद्र टिप्पणी करने के कारण स्थानांतरण कर दिया गया था। किसान की माना जाए तो उनका सहयोग नवीन कुमार यादव और राजेंद्र कुमार यादव लेखपाल करते थे। इस गांव में मक्खन यादव भी निवास करते हैं। आरोप है कि गांव में मक्खन यादव का कोई भी मकान आदि नहीं है। लेकिन लेखपाल मनोज यादव की जादुई और करामाती कलम ने बच्चन मिश्रा, आसाराम मिश्रा, राजेंद्र प्रसाद मिश्रा, कृष्ण कुमार मिश्रा एवं पंचदेव मिश्रा पुत्रगण स्व. रमाशंकर मिश्रा की आबादी में बनी पक्की मकान को मक्खन यादव पुत्र दूखरन यादव का मकान बताते हुए आराजी नंबर 54/ 0.045 हेक्टेयर में 365.160 वर्ग मीटर की घरौनी बना दिया। वर्षों बाद शुक्रवार को जब मक्खन घरौनी लेकर किसान बच्चन मिश्रा के पास पहुंचे और अपनी मकान बताते हुए उसकी गिरवाने की धमकी देने लगा तब जाकर किसान को लेखपाल की जादुई कारनामे का पता चल सका। उन्होंने शनिवार को भाग कर तहसील संपूर्ण समाधान दिवस प्रभारी उपजिलाधिकारी विनय कुमार के पास पहुंचे तो शिकायती पत्र और खतौनी एवं मकान का फोटो देखते ही उनकी आंखें फटी की फटी रह गई उन्होंने तुरंत बगल बैठे तहसीलदार राकेश कुमार को शिकायत पत्र थमा दिया और कहा कि इस पर शीघ्र कार्रवाई करें तहसीलदार ने जेब से फोन निकाला और तुरंत वर्तमान लेखपाल विपिन यादव को फोन कर पूछा की किसी दूसरे की जमीन में किसी दूसरे की घरौंनी कैसे कर दिया गया लेकिन यह बात लेखपाल से तहसीलदार हंस-हंसकर पूछ रहे थे। लेखपाल ने तहसीलदार को क्या जवाब दिया पता नहीं चल सका लेकिन किसान को तहसीलदार की हंसी से इतना जरूर पता लग गया कि अब अधिकारियों से लेकर हाईकोर्ट तक चप्पल जरूर घिसना पड़ेगा। फिलहाल तहसीलदार ने घरौनी का संशोधन करवाने का किसान को आश्वासन दिया है।

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